Selfishness
सैम मेरी गोद में था और एरिक अभी-अभी स्कूल के लिए घर से निकला था। मेरे पति जोनाथन मेरे पुराने पंखे को साफ करने की कोशिश कर रहे थे। सुबह 9:00 बजे वह अपनी कंपनी के लिए घर से निकले। वह कंपनी में मैनेजर थे। उनके भाई पढ़ाई कर रहे थे और बेहतर जीवन के लिए विदेश जाने की कोशिश कर रहे थे। जोनाथन अपने परिवार का बहुत ध्यान रखते थे। जोनाथन के परिवार के अन्य सदस्य विदेश में बस गए थे। उनके माता-पिता अपने गाँव के बड़े-बड़े आलीशान घरों में रहते थे। हम हर रविवार को चर्च जाते थे और खुश रहते थे और घर के समारोहों में हमेशा भाग लेते थे। सब कुछ ठीक चल रहा था, जोनाथन के ड्यूटी जाने के बाद मैं घर के काम-काज में व्यस्त हो गई। तभी किसी ने बाहर से आवाज लगाई ..मैं भागते हुए बाहर आई, वो मैथ्यू था हमारा पड़ोसी, बोला भाभी जल्दी हॉस्पिटल चलो भैया को कुछ समस्या हो गई है, मैंने पूछा क्या हुआ? लेकिन उसने फिर वही बात दुहराई। मैं अपने सैम के साथ जल्दी से अस्पताल भागी । काफी लोग वहां इकठ्ठा हो गए थे। मुझे डर लगने लगा था... किसी अनहोनी की.. मैं और आगे बढी तो देखा जोनाथन एक बिस्तर पर पड़े थे.... एक कार ने एक्सीडेंट कर दिया था.. जोनाथन अब हमारे बीच नहीं रहे.. काटो तो खून नहीं.. मैं एकदम से सन्न पड़ गई....
बच्चे पूछते अपने पापा के बारे में, मेरे पास केवल एक ही जवाब होता था बाहर गए है जल्दी आ जायेंगे। दिन, सप्ताह और महीने बीतते रहे पुंजी भी खत्म होने के कगार पर पहुंच गई। सारे भाई भी जैसे-तैसे अपनी पढाई पूरी करने में लगे रहे।
अब मैं अपने घर की चारदीवारी में नहीं रह सकती थी। घर के खर्च के लिए नौकरी करना ही एक रास्ता बचा। एक कंपनी में आख़िर काफ़ी कोशिश के बाद नौकरी लग गई. सब कुछ एकदम से बदल गया। सारी ख़ुशी गायब सी हो गई। बच्चे अभी छोटे थे, मेरी उम्र भी मुश्किल से 30-32 साल होगी। मेरी कंपनी में ही मैथ्यू नौकरी करता था। जॉब के साथ बच्चों को संभालना काफी मुश्किल हो रहा था, मुझे ना चाहते हुए भी मैथ्यू से मदद लेनी पड़ती थी। मैथ्यू ने विनती भरे स्वर में कहा भाभी आप किसी भी काम के लिए जरा सा भी संकोच कभी भी मत कीजिएगा। ये मासूम से बच्चे, इनकी क्या गलती थी जो भगवान ने इन्हें इतना बड़ा दुख दे दिया। मैथ्यू बच्चों से हमेशा प्यार से ही पेश आता... मेरे घर वाले अपने में बिजी हो गए। ऊपर से सब कहते, कोई चिंता की बात नहीं लेकिन हकीकत में मौका पड़ने पर कोई भी मदद नहीं करता बल्की ताने ऊपर से मारते. मैं ही अकेली थी जो अपने बच्चों की देखभाल कर रही थी। चर्च आते -जाते लोग कहते दूसरी शादी कर ले तू.. इतना पहाड़ जैसा जीवन दो बच्चों के साथ कैसे निभायेगी? बच्चे अभी छोटे हैं जिसके साथ शादी करेगी उसके साथ घुल - मिल जायेंगे.
अंततः इन्ही सब में उलझी रहती और अब अपने काम पर भी ध्यान ना दें पाती. अचानक एक दिन चर्च के Father ने मुझसे पूछा अगर तुम कहो तो मैं तुम्हें एक व्यक्ति के बारे में बता सकता हूं जो तुमसे शादी कर सकता है... मैथ्यू... तुम उसको अच्छे से जानते हो। मैथ्यू को मैं सब बातों के लिए मनाऊंगा।
आख़िर वो दिन भी आ गया जब मेरी और मैथ्यू की शादी हो गई। जोनाथन के परिवार वाले इससे खुश नहीं थे। सब ने मुझसे सारे रिश्ते तोड़ लिए। किसी ने मेरी भावनाओं का सम्मान नहीं किया। मैंने भी अपने को स्वार्थी मान लिया.
काफ़ी संकोच में रहने के बाद हम दोनों एक पति-पत्नी की तरह रह पाये. आसान नहीं था हम दोनो के लिए। लेकिन नियति को शायद यहीं सब मंजूर था.
समय भागता गया, मेरे और मैथ्यू के केवल यही दो बच्चे रहे। बच्चे धीरे-2 बड़े हो गए सब अपनी मेहनत से अपना अच्छा जीवन जी रहे हैं...
V.nice
ReplyDeleteThank you Sir
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